श्रद्धांजलि
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— अनन्तश्री विभूषित शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु श्रीमच्छंकराचार्य स्वामी श्रीस्वरूपानन्दजी महाराज, द्वारिका की पावन लेखनी से —
स्मृति – कुसुमाञ्जलि नामसे श्रीहरिबाबाजी महाराजकी स्मारिका प्रकाशित की जा रही है- यह जानकर प्रसन्नता हुई । श्रीहरिबाबाने हरि-भक्ति और हरिनाम का उत्तर भारत में प्रचार कर के सनातन संस्कृति और भारतकी सेवा की है। उनके उज्ज्वल चरित्र, शील और अखण्ड साधना से सहस्रों साधकोंको प्रेरणा मिली है। स्मारिका के द्वारा वह भक्तिकी धारा, जो उन्होंने प्रवाहित की थी उसका स्रोत अजस्र रूपसे प्रवाहमान होता रहे-इसके लिए हमारा हार्दिक आशीर्वाद ।
“उनके उज्ज्वल चरित्र, शील और अखण्ड साधना से सहस्रों साधकोंको प्रेरणा मिली है।”
- हरिनाम प्रचार: आपने सम्पूर्ण उत्तर भारत में हरि-भक्ति और हरिनाम का दिव्य अलख जगाकर सनातन संस्कृति की अनुपम सेवा की।
- अखण्ड साधना: आपका उज्ज्वल चरित्र, शील और तपोमय जीवन आज भी सहस्रों साधकों का मार्ग प्रशस्त कर प्रेरणा प्रदान कर रहा है।
- हार्दिक आशीर्वाद: स्मारिका के माध्यम से आपके द्वारा प्रवाहित की गई भक्ति की पावन धारा का पवित्र स्रोत सदैव अजस्र रूप से प्रवाहमान रहे।
