परम पूज्य संत श्री हरि बाबा जी महाराज

✨ जन्म और बाल्यवस्था

संवत् १९४० की बात है। वैशाख का महीना था। आपकी माता जी बाहर सोई हुई थीं, कि इन्हें दिव्य गम्भीर शब्द सुनाई दिया। उन्होंने सुना-‘मैंने तुम्हारे पुरखाओं को..आगे

✨ अनोखा संकल्प

गंगा नदी की भीषण बाढ़ से त्रस्त उत्तर प्रदेश के गवां और सहसवान क्षेत्र की जनता की असहनीय पीड़ा को देखकर दयालु बाबा जी का हृदय द्रवित हो उठा।..आगे

✨ ज्ञान से भक्ति की ओर

हाँ सूर्यास्तके पश्चात् नित्यप्रति जाने लगे और बड़े मनोयोगसे संकीर्तन सुनने लगे। इससे आपको बड़ा सुख मिला और धीरे धीरे उस संकीर्तनमें आपको भावसमाधि होने लगी.. आगे

संत श्री हरि बाबा जी महाराज

संत श्री हरि बाबा जी महाराज
॥ जय श्री हरि ॥

✨ उच्च शिक्षा

पको इस भौतिक शरीर का डाक्टर नहीं बनना था, आपने तो मानवमात्र की आध्यात्मिक चिकित्सा करके उससे भव-बन्धनकी मुक्तिके लिये ही इस धरा-धाम में अवतार लिया था.. आगे

✨ गृह-त्याग और संन्यास
निर्माण

आपने गुरुदेवके चरणोंमें कई वार प्रार्थना की कि मुझे संन्यास दीक्षा दे दीजिये। परन्तु उन्होंने स्पष्ट अस्वीकार करते हुए कहा कि हम किसीको साधु नहीं बनाते । जब समय आवेगा तो तुम स्वयं साधू बन जाओगे।..आगे

✨ महासमाधि

जनवरी 1970 में वाराणसी में श्री माँ आनंदमयी जी की पावन उपस्थिति में उन्होंने महासमाधि ली। उनके बंध धाम स्थित समाधि स्थल पर आज एक भव्य मंदिर सुशोभित है।..आगे

श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा-ज्ञानयज्ञ 2026: पितृ पक्ष में पितरों के उद्धार हेतु विशेष आयोजन

सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे। तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नुमः ॥ 🪔 पितृ पक्ष में 🪔🪔पितरों के उद्धार हेतु 🪔 श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा-ज्ञानयज्ञ 02 अक्टूबर....

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कथा व्यास:परम पूज्य आचार्य श्री दिनेश चन्द्र जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन)

।। श्री राधा कृष्णाय नमः ।। जन्माष्टमी के पावन पर्व के शुभ अवसर पर आप सभी श्रद्धालुओं को सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा....

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नामावतार दिव्य स्वरूप पूज्य महाराज जी – हरि बाबा जी

परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज और अनंत श्री विभूषित श्री उड़िया बाबा जी महाराज का प्राकट्य इस धरा पर जन-कल्याण और भक्ति-ज्ञान के प्रचार के लिए हुआ था। ये दोनों महापुरुष समकालीन युग के साक्षात् शिव और हरि के रूप माने जाते थे। जहाँ एक ओर श्री उड़िया बाबा जी महाराज अद्वैत वेदांत के साक्षात् विग्रह थे, वहीं दूसरी ओर श्रीहरि बाबा जी महाराज साक्षात् संकीर्तन और अखंड सेवा के अवतार थे। इन दोनों महापुरुषों का जीवन चरित्र आज भी काफ़ी प्रेरणादायक है।


श्रीहरि बाबा जी महाराज

पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज


श्री उड़िया बाबा जी महाराज

पूज्य श्री उड़िया बाबा जी महाराज

✨ कलयुग नाम अधारा, सुमिर सुमिर उत्तरहि पारा। ✨

कलियुग के इस घोर तमस में नाम-संकीर्तन की परम पावन महिमा से जन-चेतना को आलोकित करने वाले परम पूज्य श्री श्री १००८ श्रीहरि बाबा जी महाराज की महिमा का विस्तार, अनंत श्री विभूषित परम पूज्य श्री श्री १००८ श्री उड़िया बाबा जी महाराज के पावन स्मरण और मंगलमय आशीर्वाद के बिना सर्वथा अधूरा है। उनके बिना ऐसा प्रतीत होता है मानो लेखनी के पास शब्द तो हैं, परंतु अंतर्मन की अभिव्यक्ति मौन है।
सर्वप्रथम, मैं स्वाति बाबा के श्रीचरणों में साष्टांग दंडवत प्रणाम निवेदित करती हूँ और श्री महाराज जी के चरणों से उस आत्मिक बल की भिक्षा मांगती हूँ, जिससे अपनी तुच्छ लेखनी के माध्यम से आप दोनों महापुरुषों की अलौकिक महिमा की एक लघु झांकी यहाँ प्रस्तुत कर सकूं।
मैंने अपने इस मानव जीवन में परम पूज्य श्री बाबा (उड़िया बाबा जी महाराज) और परम कृपालु श्री महाराज जी (श्रीहरि बाबा जी महाराज) के दिव्य चरित्र व लीलाओं को अपनी पूजनीय माता जी श्रीमती नंदिनी और श्रद्धेय नाना जी श्री गिरीश बाबू मोडवेल (इटावा) के मुखारविंद से सुना, समझा और अपने हृदय-सिंहासन पर धारण किया है। वे सदैव भाव-विभोर होकर बताते थे कि श्री महाराज जी और श्री बाबा साक्षात् एक ही परम चेतना, एक ही मन के दो दिव्य स्वरूप थे—जहाँ एक स्वरूप साक्षात् ‘सिद्ध’ था, तो दूसरा स्वरूप पूर्ण ‘साध्य’ था। पूज्य उड़िया बाबा जी महाराज और पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज, मानो लोक-कल्याण के लिए दो शरीरों में विभक्त अवश्य थे, परंतु आत्मिक रूप से सदैव अखंड और अविभक्त थे।

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राधे – राधे
राधे – राधे
सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे।
तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नमः ॥

॥ पितृ पक्ष में पितरों के उद्धार हेतु ॥

श्रीमद्भागवत

सप्ताह कथा-ज्ञानयज्ञ
02 अक्टूबर दिन शुक्रवार से 8 अक्टूबर दिन वीरवार 2026 तक

📅 कार्यक्रम विवरण

01 अक्टूबर दिन वीरवार:
कलश शोभा यात्रा एवं मंडप प्रवेश — सुबह 11 बजे
02 अक्टूबर दिन शुक्रवार से प्रतिदिन:
• वेदी पूजन — प्रातः 9 बजे
• कथा समय — दोपहर 03 बजे से शाम 07 बजे तक
09 अक्टूबर दिन शुक्रवार:
हवन — प्रातः 9 से दोपहर 12 बजे तक

👉 तदोपरांत विशाल भण्डारा

कथा व्यास

आचार्य श्री दिनेश चन्द्र जी महाराज

(श्री धाम वृन्दावन)

सम्पर्क सूत्र: 9719469527, 7017353871

इस महायज्ञ में हिस्सा लेकर अपने पितरों के उद्धार हेतु पुण्य के भागी बनें।