॥ संत समागम परम सुख जाना ॥

✨ श्री हरिबाबा जी के समकालीन संत ✨

परम पूज्य श्री हरिबाबा जी महाराज (1885–1970) के समय और उनसे जुड़े आध्यात्मिक परिवेश में कई महान संत और महात्मा उपस्थित थे। वे अक्सर संतों के समागम और सत्संग में लीन रहते थे। उनके समकालीन प्रमुख संतों में निम्नलिखित नाम प्रमुख हैं:


श्री श्री माँ आनंदमयी

🌸 श्री श्री माँ आनंदमयी 🌸

माँ आनंदमयी और हरिबाबा के बीच गहरा आध्यात्मिक संबंध था। श्री महाराज जी माँ को ‘माँ’ कह के संबोधित करते थे और माँ, श्री हरिबाबा जी महाराज को ‘पिताजी’ कहकर संबोधित करती थीं। हरिबाबा के अंतिम समय में, जब चिकित्सकों ने जवाब दे दिया था, तब माँ आनंदमयी ही उन्हें अपने साथ वाराणसी (काशी) ले गई थीं।


श्री स्वामी सच्चिदानंद जी

🌸 श्री स्वामी सच्चिदानंद जी 🌸

ये होशियारपुर (पंजाब) में हरिबाबा के अपने पूज्य गुरुदेव थे। हरिबाबा ने अपना प्रारंभिक जीवन और सेवा इन्हीं के सानिध्य में बिताई थी।


स्वामी अखंडानंद सरस्वती

🌸 स्वामी अखंडानंद सरस्वती 🌸

विरक्त संत और वेदांती, स्वामी अखंडानंद जी महाराज, हरिबाबा के समकालीन थे। वे अक्सर वृंदावन में हरिबाबा के संपर्क में आते थे। स्वामी अखण्डानंद जी महाराज परम पूज्य श्री श्री 108 उड़ीया बाबा जी महाराज के शिष्य थे। पूज्य उड़ीया बाबा जी के सानिध्य में ही श्री हरिबाबा जी और स्वामी अखण्डानंद सरस्वती जी का संपर्क प्रगाढ़ हुआ।


बाबा नीम करोरी बाबा

🌸 बाबा नीम करोरी बाबा 🌸

श्री हरिबाबा जी महाराज के समकालीन संतों में एक दिव्य विभूति श्री नीम करोरी बाबा की भी थी, जिनका आध्यात्मिक प्रभाव अलौकिक था।


श्री सिद्धेश्वरानंद जी महाराज

🌸 श्री सिद्धेश्वरानंद जी महाराज (श्रीजी) 🌸

ब्रज मंडल के एक प्रमुख सिद्ध संत, जिन्हें हरिबाबा के दिव्य संस्मरणों में उनका परिचय विशेष रूप से अंकित है।


पायलट बाबा

🌸 पायलट बाबा (कपिल सिंह) 🌸

1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर के रूप में, उन्हें हरिबाबा के दर्शन और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था। बाद में वे संन्यास लेकर पायलट बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए।

प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी महाराज

🌸 प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी महाराज 🌸

प्रभुदत्त ब्रह्मचारी का जन्म संवत 1942 (1885 ई.) में जनपद अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के ग्राम अहिवासी नगला में एक निर्धन परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम पण्डित मेवाराम था। विदुषी माता अयुध्यादेवी से संत सुलभ संस्कार प्राप्त कर उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया था। वे संकीर्तन और गौ-सेवा के महान संरक्षक थे।

स्वामी रामतीर्थ जी महाराज

🌸 स्वामी रामतीर्थ जी महाराज 🌸

स्वामी रामतीर्थ का जन्म 22 अक्टूबर 1873 (दीपावली के दिन) पंजाब के गुजरांवाला जिले के मुरारीवाला गांव में (अब पाकिस्तान में) हुआ था। वेदान्त दर्शन के महान प्रचारक और संन्यासी स्वामी जी के बचपन का नाम गोस्वामी तीर्थ राम था। उनका व्यावहारिक वेदान्त संदेश पूरे विश्व में विख्यात है।

स्वामी रामतीर्थ जी महाराज

🌸 धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज 🌸

श्रीमज्जगद्गुरु हरिहरानंद सरस्वती जी ‘स्वामी करपात्री’ (1907–1982) भारत के एक महान संत, स्वतंत्रता सेनानी, और प्रखर विद्वान थे। वे दशनामी संन्यासी थे और अपनी विलक्षण विद्वता के कारण उन्हें ‘धर्मसम्राट’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। केवल अंजलि (कर) को ही पात्र की तरह उपयोग करने के कारण वे ‘करपात्री’ कहलाए।

श्री प्रयागदास जी महाराज

🌸 मिथिला के सिद्ध एवं उच्च कोटि के रसिक संत मामा श्री प्रयागदास जी महाराज 🌸

मामा श्री प्रयागदास जी मिथिला के एक अत्यंत सिद्ध और उच्च कोटि के रसिक संत थे। उनकी भावभूमि इतनी उन्नत और पवित्र थी कि वे सांसारिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त थे। प्रभु के प्रति उनका प्रेम बहुत ही विलक्षण और आत्मीय था। वे माता जानकी (सीता जी) को अपनी सगी बड़ी बहन (जीजी) और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को अपना जीजा जी मानते थे। इसी पारिवारिक रिश्ते के कारण संत समाज और भक्तजन उन्हें सम्मान से ‘मामा’ कहकर पुकारते थे। भगवान को सगे रिश्तेदार की तरह भजने वाले मामा प्रयागदास जी का हृदय अत्यंत कोमल और संवेदनशील था।

संत संग अपवर्ग दुआरु। सकृत संग मति मुदित सुधारु॥
कोटि जनम के पाप नशाहीं। संत समागम जो जन पाहीं॥

✨ ॥ संतों के चरणों में अनंत कोटि प्रणाम ॥ ✨