॥ श्री हरि शरणागतम् ॥

✨ श्री हरि चालीसा ✨

श्री हरि बाबा जी
सुमिरन कर गुरुदेव का धार शरद का ध्यान !
श्री हरि चालीसा रचु, कृपा करहुँ भगवान !!
संतमिलन श्री हरिकथा, गंगा का स्नान !
संकीर्तन नित श्रवण कर हरिबाबा के नाम !!
जय जय हरि बंधा बासी ! 🌸 खादर बीच रचाई काशी !!
हरि हरि हरिबोल सुनायो ! 🌸 सब मुक्तिन को द्वार बनाओ !!
गन्धोवाल पावन हरी कीन्हा ! 🌸 दर्श दिखा पितु माँ सुख दीन्हा !!
विद्या पढ़ गुरु आश्रम आएं ! 🌸 सेवा कर दीनन मन भये !!
स्वं संत बन प्रेम लुटाओ ! 🌸 खादर आ हरिनाम सुनाओ !!
ग्रामीणन हरि खेल खिलाओ ! 🌸 गावं वृन्दावन जहाँ बनाओ !!
कभी गौर कभी श्याम बन ! 🌸 राम लखन हनु कभी सिया संग !!
गंगा बाढ़ बहे नर नारी ! 🌸 बांध बना सब विपदा टारी !!
हरि बोल कहे घंटा बजावें ! 🌸 बाल बृंद गृह तज चले आवें !!
श्रम सेवा कर फल दिखलाओ ! 🌸 कलियुग हरि अबतार करायो !!
हरि बांध जो मिट्टी डाले ! 🌸 जन्म कोटि के पाप कटावे !!
प्रेम सहित हरि बोल सुनायो ! 🌸 यम दूतो की त्रास मिटावे !!
चहुँ दिशि हरि घंटा धुनि बाजे ! 🌸 दाल पात हरि बोल सुनावें !!
दीन ज्ञान हरि किये सनाथा ! 🌸 अब छोड़त क्यों पकड़ो हाथा !!
त्रिबिध ताप हरि क्षण में हरो ! 🌸 त्राहि त्राहि हरि चरनन परो !!
नहीं जानु जप तप व्रतपूजा ! 🌸 आस तिहारी कोई न दूजा !!
कैसे मिटे मोर अज्ञाना ! 🌸 नहीं जानत बालक नदाना !!
जब जब भरी भीड़ पड़ी है ! 🌸 तब हरि लीला आन करी है !!
भक्तो को तो क्षण में तारो ! 🌸 जाने हरि जब पतित उबारो !!
मोको पतित न दिखे स्वामी ! 🌸 फासो रहो नित बिषयी कामी !!
नैया डगमग डोल रही है ! 🌸 तेरे सहारे पर छोड़ रखी है !!
दीनन् दीन बंधू कहलावो ! 🌸 जन की बार बिलम्ब न लायो !!
आज हरि हर बंधा बारे ! 🌸 घंटा धारी खादर बारे !!
एक बार फिर धूम मचा दे ! 🌸 हरि बोल हरि नाम सुना दे !!
तेरे हांथो लाज हमारी ! 🌸 बनी बात बिगड़ी है सारी !!
साधु संत टेरत हरि आजा ! 🌸 दीन खड़े हरि दर्श दिखा जा !!
हरी हरी हरि बोल जो गावे ! 🌸 हरि बाबा सों नेह बढ़ावे !!
मन चिंता पल में कट जावे ! 🌸 प्रेम से जो हरि कीर्तन गावें !!
जीवन सफल बही कर माने ! 🌸 जो हरिहर को अपना जाने !!
हरिद्वार से जो जल ले अावे ! 🌸 बन्देश्वर पे आन चढ़ावे !!
मन कामना सिद्ध सब पावें ! 🌸 जो यह चालीस नर गावें !!
सफल वासनाएं कट जाती ! 🌸 धुप दीप कर जोरे बाती !!
निर्मल मन हो भेंट चढ़ावे ! 🌸 फूल पत्र श्रद्धा से लावे !!
नेम प्रेम से पाठ केरे जो ! 🌸 ध्यान रखे सब छोड़ हरी को !!
ताकि तन नहीं रहे कलेशा ! 🌸 हरी हरी हरि जापे हमेशा !!
भूत प्रेत सम्मुख न आवे ! 🌸 नाम लेत हरि को भाग जावे !!
गंगा नहाय कर बन्दा बासा ! 🌸 संत दर्श कर पूरी आशा !!
नित्य बाँध के दर्शन पावे ! 🌸 हरि सम्मुख जो पाठ सुनावे !!
साधन धाम मुक्ति का द्वारा ! 🌸 पाठ करे जो ग्यारह बारा !!
साक्षात हरि गौर कहाये ! 🌸 दीनन दुःख टारन हरी आये !!
निश्चय सत्य हृदय से पाठ करो चालीस !
हम सबकी कामना पूर्ण करे जगदीश !!

✨ ॥ इति श्री हरि चालीसा समाप्त ॥ ✨