वैराग्य: ज्ञान और भक्ति की पावन नींव ◆ ❖ ◆ परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज के श्रीमुख से वैराग्य का परम गोपनीय सिद्धांत राग्य ही ज्ञान, भक्ति आदि की सुदृढ़ नींव है। इसका वास्तविक स्वरूप ऐसा विलक्षण है कि जिस पुरुष के पास जिस भी सांसारिक वस्तु या प्रतिष्ठा का अभिमान हो, वह कल्याण….
निर्विकल्प समाधि और गुरु-भेंट की पावन लीला ◆ ❖ ◆ जीवन-वृत्त: परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज की अलौकिक सामर्थ्य (अंश – कुसुमांजलि) रीमहाराज जी भिक्षा के लिए एक माता के घर जाया करते थे। वे माता जी धन से सम्पन्न, परम श्रद्धावती और अनन्य भक्तिमती थीं। वे सदा श्री महाराज जी से प्रेमपूर्वक हठ….
बन में अलौकिक प्रसाद लीला ◆ ❖ ◆ जीवन-वृत्त: बन में सिद्ध महापुरुषों की दिव्य लीला (अंश – कुसुमांजलि) क अध्याय में श्रीमहाराज जी किसी वृद्ध पण्डित जी के साथ काशी से दूर बन में चले गये। वहाँ घूमते हुए दोपहर का समय हो गया। दोनों को बड़ी भूख लग आई। भोजन का कोई प्रबन्ध….
भगवत्-मार्ग में प्रवृत्ति ◆ ❖ ◆ परम पूज्य श्री हरि बाबा जी महाराज ने स्वयं अपने गुरु का यह वृत्त लिखा था (अंश – कुसुमांजलि) अपने बड़े भाई साहब की कृपा से भगवत्-मार्ग में प्रवृत्ति हुई। उनको श्रीगुरु महाराज (श्री श्रीसच्चिदानन्द गिरि महाराज) की चरण-शरण प्राप्त हो चुकी थी। मुझसे बोले— ‘मैं तुम्हें मार्ग बताता….
श्री हरिबाबा जी की संन्यास-दीक्षा ◆ ❖ ◆ जीवन-वृत्त: श्री हरिबाबा जी की संन्यास-दीक्षा – और श्री कपिल भगवान के दर्शन (अंश – कुसुमांजलि) चपन में रात को अपनी दादी के साथ सोते थे। दादी रात को दो बजे उठ कर भजन में बैठ जातीं। बालक को भी जगाकर भजन में बैठा देतीं। कहतीं— ‘बच्चा!….
प्रेम-तत्त्व का साकार दर्शन और अंतःकरण शुद्धि ◆ ❖ ◆ दिव्य संस्मरण: स्वामी श्री आत्मानंदगिरि जी महाराज की अलौकिक अनुभूति (स्मृति कुसुमांजलि – पृष्ठ १४१) रमआदरणीय स्वामी श्री आत्मानंदगिरि जी महाराज उच्च कोटि के साधक भक्त रहे हैं। आज श्री हरि बाबा जी महाराज स्मृति कुसुमांजलि पृष्ठ संख्या १४१ पर उन्हीं का लिखा एक दिव्य….
दो शब्द: पावन जीवन-चरित्र की प्रस्तावना ◆ ❖ ◆ जीवनी के प्रधान पार्षद पंडित लालता प्रसाद जी महाराज के हृदयोद्गार स जीवनी के लेखक पंडित लालता प्रसाद जी निसंदेह श्री हरि बाबा जी महाराज के प्रधान पार्षद हैं। इतना संचार और श्री हरि बाबा जी महाराज के भावों को व्यक्त करने की इतनी क्षमता श्री….
