आरती श्री हरिबाबा की कीजे ! तन मन धन न्योछावर कीजे !!
कोटि चंद्र रवि की छवि न्यारी ! मन मुस्कान मधुर अति प्यारी !!
कोटि चंद्र रवि की छवि न्यारी ! मन मुस्कान मधुर अति प्यारी !!
अपना सर्वस्व इनको दीजे ! गले फूलो का हार बिराजे !!
कुमकुम चन्दन भाल बिराजे ! हरि बोल अमृत रस पीजे !!
कुमकुम चन्दन भाल बिराजे ! हरि बोल अमृत रस पीजे !!
तीरथ खादर बीच बनाया ! प्रेम सहित हरी बोल सुनाया !!
बाँध धाम हरि दर्शन कीजे ! प्रेम से मिली हरि कीर्तन गावो !!
बाँध धाम हरि दर्शन कीजे ! प्रेम से मिली हरि कीर्तन गावो !!
कंचन थार कपूर सजायो ! फूल गुलाब जो हरि को चढ़ावे !!
‘द्रौपदी’ जन्म सुफल करि लीजे !!
‘द्रौपदी’ जन्म सुफल करि लीजे !!
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

