श्री हरि स्तुति

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— परम पूज्य श्री हरि बाबा जी महाराज के चरणों में अनन्य प्रार्थना —

परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज
परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज

जय जय हरिबाबा तीर्थ बनावा गंगा तीर बसइया,
जय घेन्टाधारी कीर्तनकारी खादर आये बचईया ।।

नहि जप तप जाने योग पहचाने धर्म सुना नहि काना,
हम दीन अभागी कर बड़ भागी क्यों कर प्रेम बढ़ाना।।

कृपा हरि कीनी विनय सुन लीनी क्षण में कष्ट मिटायें,
हम कौन जन्मकरि पुण्य करे हरि जो प्रभु खादर आये।।

कलि गौर कहाये प्रेम लुटाये खादर तीर्थ बनाये,
हरि बोल सुनायो घन्टा बजायो जंगल मंगल कराये।।

बहु अधम उबारे दीन जो तारे दीन बन्धु कहलाये,
हरि रूप दिखाये दास लुभाये कीर्तन घर घर कराये।।

प्रिय भक्त दुलारे खादर बारे कैसे सुधि विसराई,
जल्दी सुधि लीजे देर न कीजे आकर करहू सहाई।।

सब कुछ अर्पण तन मन धन जीवन शरण तिहारे आये,
चरणन रज सेवा माँगू देवा निष्काम भक्ति हो जाये।।

जय जय गुरुदेवा नैया खैवा द्वार बाँध पे आयो,
है दास तिहारी ‘द्रोपदी’ पियारी प्रेम हरि को पायो।।

📜 दोहा
श्री हरि स्तुति प्रेम से पढ़े सुने चित लाय।
श्री हरि बाबा की कृपा से भव बन्धन कट जाय॥

  • परम पूज्य बाबा जी महाराज ने गंगा जी के बीहड़ खादर क्षेत्र में घण्टा-ध्वनि और हरिनाम संकीर्तन से मंगलमय महातीर्थ की स्थापना की।
  • दीन-बन्धु अहैतुकी कृपा: अपने भक्तों की करुण पुकार क्षण मात्र में सुनकर समस्त कष्टों का हरण करना और घर-घर में कीर्तन रस जगाना ही आपका दिव्य स्वभाव है।
  • निष्काम भक्ति वरदान: जो भी साधक अपना तन, मन, धन और सर्वस्व जीवन आपके चरणों में अर्पित करता है, उसे सहज ही भव-बंधन से मुक्ति और निष्काम प्रेम की प्राप्ति हो जाती है।

“हरि बोल हरि बोल हरि बोल संकीर्तन रस पीजै”