इस से बड़ा चमत्कार और क्या है ?
पूज्य श्री श्री उड़िया बाबा जी महराज से जब प्रसिद्ध आध्यात्मिक लेखक पॉल ब्रन्टन ने उनसे कोई सिद्धि दिखाने की बात कही, तब बाबा ने बहुत सुंदर उत्तर दिया — “जल की एक बूँद शरीर बन गई, चलती है, सोचती है और बोलती है — इससे बड़ा चमत्कार और क्या होगा?
वृंदावन में उन्होंने श्रीकृष्ण आश्रम की स्थापना की, जहाँ सत्संग, नाम-संकीर्तन, वेदान्त चर्चा और साधना की धारा प्रवाहित होती रहती थी। वे किसी एक मार्ग तक सीमित नहीं थे — भक्तों के लिए
प्रेममयी भक्ति, साधकों के लिए साधना और ज्ञानियों के लिए वेदान्त का प्रकाश थे।
उनका संदेश था कि केवल शास्त्र पढ़ने से आत्मज्ञान नहीं होता,उसके लिए अभ्यास, वैराग्य, नाम स्मरण और निरंतर आत्मचिंतन आवश्यक है।
श्री उड़िया बाबा जी महाराज का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा संत चमत्कारों का प्रदर्शन नहीं करता, बल्कि उसका पूरा जीवन ही ईश्वर की उपस्थिति का सबसे बड़ा चमत्कार बन जाता
है।
स्वामी पूर्णानन्दतीर्थ
(संकलनकर्ता :-चन्दन)
