नई कोठरीयों की प्रतिष्ठा:-अन्तर्यामी पूज्य उड़ियाबाबा जी महराज
एक दिन रात को स्वप्न में बाबा ने दर्शन दिया और बोले, ‘फलाहार का प्रबन्ध कर, आज मौनीबाबा आ रहे हैं।” बस, उसी दिन दस-ग्यारह बजे मौनीबाबा आ यये । मैंने उन्हें स्वप्न का सारा हाल सुनाया। वे बोले, “जैसे गाड़ी छूटने से पहले तार बाबू आगे को तार देता है कि गाड़ी जा रही है, लाइन साफ रखो, उसी प्रकार
बाबा ने आगे से तुम्हें फलाहार का प्रबन्ध करने की सूचना दी थी।” मैंने कहा, “बाबा ने आपके आने की सूचना दे दी थी, अब आप बाबा को ले आओ।” वे बोले, “वे तो रास्ता चलते मिल जायेंगे।” ऐसा ही हुआ। सीताराम बाबा श्रीहरिबाबा जी को ले आये और बाबा अन्नूपशहर जा रहे थे, सोमैं जाकर प्रार्थना करके उन्हें ले आया। फिर तो कीर्तन और श्री रामायण जी का गान होने लगा। आश्रम में कुष्ठ नयी कोठरियां बनी थीं। इस प्रकार महापुरुषों के पधारने से उनकी प्रतिष्ठा हो गयी ।
पूज्य बाबा के ऐसे ही अनेकों विचित्र चरित्र हैं, उनका कहाँ तक वर्णन किया जाय ?
(श्रीज्वालासिंहजी प्रबन्धक भृगुक्षेत्र, भेरिया)
