
मैं अपने बाबू जी के बारे मे क्या कहूँ वह इस जीवन के तप को श्री हरि चरणों में समर्पित कर हम दोनों बहन भाई (नन्दिनी व केशव) के लिए जीवानोद्धार के द्वार खोल गये उन का श्री महाराज जी के प्रति समर्पणे हम लोगों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहा।
हम लोगों को बचपन से ही श्री चरणों में ले जाना व उनके सानिध्य में रहने की प्रबल इच्छा का बीजारोपण हमारे हृदयों में उन्हीं ने किया। हमारे संस्कारों में भक्ति व श्री महाराज जी के प्रति अटूट प्रेम का संचार करने वाले हमारे बाबू जी ही रहे, उसी का परिणाम है कि आज समस्त परिवार श्री महाराज जी का वर्दहस्त हमेशा महसूस करता है वह बाबू जी ही नहीं बल्कि हम लोगों की आस्था, भक्ति व शक्ति का स्रोत रहे।
बाबू जी के शब्दों में ही उनके जीवन के कुछ क्षण जो उनके बचपन की दहलीज से शुरू होकर श्री हरि चरणों में अर्पित रहें।
- नन्दिनी
