मनुष्य मात्र के लिए कल्याणमयी गंगा: पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज के जीवन-चरित्र की अमर प्रस्तावना

दो शब्द: पावन जीवन-चरित्र की प्रस्तावना

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जीवनी के प्रधान पार्षद पंडित लालता प्रसाद जी महाराज के हृदयोद्गार

स जीवनी के लेखक पंडित लालता प्रसाद जी निसंदेह श्री हरि बाबा जी महाराज के प्रधान पार्षद हैं। इतना संचार और श्री हरि बाबा जी महाराज के भावों को व्यक्त करने की इतनी क्षमता श्री महाराज जी के समस्त भक्त परिकर में संभवतः और किसी में भी नहीं है। आदरणीय लालता प्रसाद जी ने जो कुछ लिखा है वह बहुत ही सजीव है, उसमें श्री महाराज जी की बोलचाल, स्वभाव और रहन-सहन की छाया स्पष्ट दिखाई देती है।

परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज

परम पूज्य श्रीहरि बाबा जी महाराज

श्री महाराज जी के जीवन का शब्दमय चित्र

यह जीवन चरित्र वास्तविकता में श्री महाराज जी के जीवन का साक्षात् शब्दमय चित्र ही है। इसमें उनके द्वारा समय-समय पर भक्तों को दिए गए कल्याणकारी उपदेशों और अलौकिक चरित्रों को इस प्रकार संजोया गया है, मानो पाठक स्वयं श्री महाराज जी के सम्मुख बैठकर उनके दर्शन कर रहा हो।

“यह श्री महाराज जी के भावुक भक्तों के लिए परम आनंद का सागर है
और मनुष्य मात्र के लिए परम कल्याणमयी गंगा है।”

भक्तों के लिए पावन निर्देश

जो भी मुमुक्षु जीव भगवत्-मार्ग में अग्रसर होना चाहता है, उसके लिए पंडित लालता प्रसाद जी द्वारा रचित यह जीवन-वृत्त एक दिव्य प्रकाश-स्तंभ की भाँति कार्य करेगा। इसके प्रत्येक शब्द में श्री महाराज जी के अखंड वैराग्य और अनन्य भक्ति की सुवास समाहित है।

“हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥”