श्रद्धांजलि
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— अनन्तश्री विभूषित पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्रीमच्छंकराचार्य स्वामी श्रीनिरञ्जनदेव तीर्थजी महाराज की पावन लेखनी से —
यह पुनीत भारत-भूमि मन्त्र-दृष्टा ऋषियों, महान महर्षियों, ब्रह्मनिष्ठ तपःपूतात्माओंकी प्राकट्य स्थली है। यह इस पुण्य भूमिकी सदासे परम्परा रही है और रहेगी। श्रीहरिबाबा इसी परम्पराके एक आदर्श संत थे। उनका जीवन भक्तजनके लिए परम अनुकरणीय था ।
“श्रीहरिबाबा इसी परम्पराके एक आदर्श संत थे। उनका जीवन भक्तजनके लिए परम अनुकरणीय था।”
श्रीहरिबाबा के दिव्य जीवन-प्रसंगों और संस्मरणों को संकलित कर उनकी जन्म-शताब्दी के अवसर पर एक स्मारिका प्रकाशित की जा रही है – यह निश्चय ही एक प्रशंसनीय कार्य है। श्रीहरिबाबा के परमात्मनिष्ठ जीवन का प्रचार-प्रसार जन-मानस को समुन्नत बनाने के लिए होना ही चाहिए ।
- ऋषि परम्परा के संवाहक: आप भारत-भूमि की सनातन मन्त्र-दृष्टा और ब्रह्मनिष्ठ तपस्वी संतों की महान परम्परा के एक साक्षात आदर्श प्रतीक थे।
- अनुकरणीय जीवन: आपका पवित्र और अलौकिक जीवन प्रत्येक भक्त एवं साधक के कल्याण के लिए सदा सर्वदा अनुकरणीय है।
- जन-मानस का कल्याण: आपके परमात्मनिष्ठ और दिव्य जीवन-प्रसंगों का प्रचार-प्रसार समाज की उन्नति और आत्मिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
