उच्च शिक्षा

◆ ❖ ◆

— परम पूज्य श्रीहरिबाबा जी महाराज का पावन चरित्र —

प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा होशियारपुर में पूरी कर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिये लाहौर के किसी कालेज में भर्ती हुए। वहाँ इन्टरमीडियेट पास कर मैडिकल कालेज में भर्ती हो गये। किन्तु आपको इस भौतिक शरीर का डाक्टर नहीं बनना था, आपने तो मानवमात्र की आध्यात्मिक चिकित्सा करके उससे भव-बन्धनकी मुक्तिके लिये ही इस धरा-धाम में अवतार लिया था। महामुनि शुकदेवजी की भाँति आप जन्म से ही विरक्त थे। खेल-कूदमें कभी आपकी रुचि नहीं हुई। बचपन में ही एकान्त सेवन और ध्यान-समाधि में ही प्रेम रहा। सद्‌गुरुदेव की प्राप्ति भी प्रायः चार वर्ष की अवस्था में ही हो गयी थी। इस प्रकार आरम्भ से ही विरक्ति की सारी सामिग्री जुट गयी थी। अतः आपकी डाक्टरी की शिक्षा पूरी न हो सकी, बीच में ही आपको उसे नमस्कार करना पड़ा। यह सब बातें आगे के प्रकरणों में लिखी जायँगी। उससे पहले आपके पूज्य श्रीगुरुदेव का परिचय दे देना परम आवश्यक है। अतः अगले प्रकरणों में उन्हीं की चर्चा की जाती है।