प्रतिदिन एक श्लोक का पाठ –
अठारह पुराणोंके पाठका फल प्राप्त करता है
भगवान् श्रीकृष्णने भागवतका माहात्म्य बताते हुए ब्रह्माजीसे कहा है-
यः पठेत् प्रयतो नित्यं श्लोकं भागवतं सुत। अष्टादशपुराणानां फलमाप्नोति मानवः ॥ डीम
फिक (स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्ड, मार्गशीर्षमाहात्म्य १६ । ३३)
पुत्र ! जो प्रतिदिन पवित्रचित्त होकर भागवतके एक श्लोकका पाठ करता है, वह मनुष्य अठारह पुराणोंके पाठका फल पाता है। कलियुगमें जहाँ-जहाँ पवित्र भागवतशास्त्र रहता है, वहाँ-वहाँ सदा ही मैं देवताओंके साथ उपस्थित रहता हूँ और जहाँ-जहाँ भागवत कथा होती है, वहाँ-वहाँ मैं उसी प्रकार जाता हूँ, जैसे पुत्रवत्सला गौ अपने बछड़ेके पीछे-पीछे जाती है
यत्र यत्र भवेत् पुण्यं शास्त्रं भागवतं कलौ। तत्र तत्र सदैवाहं भवामि त्रिदशैः सह । यत्र यत्र चतुर्वक्का श्रीमद्भागवतं भवेत् । गच्छामि तत्र तत्राहं गौर्यथा सुतवत्सला ॥
सूतजीने शौनकजीको भागवतकी महिमा बताते हुए
कहा है-
एतस्मादपरं किञ्चिन्मनः शुद्धयै न विद्यते । जन्मान्तरे भवेत्पुण्यं तदा भागवतं लभेत् ॥
(पद्मपुराणोक्त भागवतमाहा० १।१२)
मनकी शुद्धिके लिये इससे बढ़कर कोई साधन नहीं
है। जब मनुष्यके जन्म-जन्मान्तरका पुण्य उदय होता है, तभी उसे इस भागवतशास्त्रकी प्राप्ति होती है।
