प्रेम तत्त्व का साकार दर्शन: पूज्य स्वामी आत्मानंदगिरि जी की दिव्य अनुभूति (स्मृति कुसुमांजलि)

प्रेम-तत्त्व का साकार दर्शन और अंतःकरण शुद्धि ◆ ❖ ◆ दिव्य संस्मरण: स्वामी श्री आत्मानंदगिरि जी महाराज की अलौकिक अनुभूति (स्मृति कुसुमांजलि – पृष्ठ १४१) रमआदरणीय स्वामी श्री आत्मानंदगिरि जी महाराज उच्च कोटि के साधक भक्त रहे हैं। आज श्री हरि बाबा जी महाराज स्मृति कुसुमांजलि पृष्ठ संख्या १४१ पर उन्हीं का लिखा एक दिव्य….