८-उपरति की ओर* किंतु आश्रम की इस धूमधाम से हमारे चरित नायक का चित्त ऊब गया | आपको तो अब किसी का शब्द भी नहीं सुहाता था फिर आप का आविर्भाव भी तो एक आश्रम की संकुचित सीमा में रहने के लिए नहीं हुआ था | अतः आप का विशाल हृदय अब विश्व कल्याण की….
हरिनाम वितरण गवां में आने पर आपकी भगवत्प्रेम लीलाएं उत्तरोत्तर बढ़ने लगीं| उन लीलाओं के द्वारा सहज ही में श्री भगवन नाम का प्रचार भी होने लगा इसके लिए आपको कोई अलग प्रयास नहीं करना पड़ा सहज आवस्था में विचरने वाले महापुरुषों के द्वारा जीवोध्दार का कार्य भी स्वभाविक ही होता है इसके लिए उन्हें….
15″भक्त वर हुलासी”- पूज्यपाद श्री हरि बाबा जी महाराज भक्ति पर करके रत्न भक्त वर हुलासी ग्राम वरोरा के रहने वाले थे वह जाति के नाई थे। हुलासी जी गांव में अपनें साधारण कुल के अनुसार उचित जीविका और 10 बीघे जमीन में खेती करके अपने कुटुंब का पालन किया करते थे ब्राह्मण और साधुओं….
