बन में अलौकिक प्रसाद लीला ◆ ❖ ◆ जीवन-वृत्त: बन में सिद्ध महापुरुषों की दिव्य लीला (अंश – कुसुमांजलि) क अध्याय में श्रीमहाराज जी किसी वृद्ध पण्डित जी के साथ काशी से दूर बन में चले गये। वहाँ घूमते हुए दोपहर का समय हो गया। दोनों को बड़ी भूख लग आई। भोजन का कोई प्रबन्ध….
भगवत्-मार्ग में प्रवृत्ति ◆ ❖ ◆ परम पूज्य श्री हरि बाबा जी महाराज ने स्वयं अपने गुरु का यह वृत्त लिखा था (अंश – कुसुमांजलि) अपने बड़े भाई साहब की कृपा से भगवत्-मार्ग में प्रवृत्ति हुई। उनको श्रीगुरु महाराज (श्री श्रीसच्चिदानन्द गिरि महाराज) की चरण-शरण प्राप्त हो चुकी थी। मुझसे बोले— ‘मैं तुम्हें मार्ग बताता….
