श्री चरणों में

16- श्री चरणों में (परम आदरणीय गुरुजी लालता प्रसाद कृत) यहां तक जो भी लिखा गया है वह सब सुना हुआ है अब आगे प्रायः देखी हुई बातें ही लिखी जाएंगे श्री चरणों में आकर इन आंखों ने जो कुछ देखा है वह सब व्यक्त करने की शक्ति तो इस लेखनी में है ही कहा….

सदा सुखी कौन है ?

सदा सुखी कौन है ? जिसको भगवान की कृपा पर भरोसा है और उनके न्याय पर विश्वास है, उसको संसार की कोई भी स्थिति विचलित नही कर सकती

विश्वास रखना चाहिय……..

निरन्तर दृढ़ विश्वास रखना चाहिय कि भगवान मेरे है और मै भगवान का हूँ । वे सदा ही मेरे हैं और अत्यन्त प्रिय हैं । उनके समान दूसरा प्यारा और प्यार करने वाला नहीं है।

मन के हारे हार , मन के जीते जीत

जिंदगी में हार तब नहीं होती जब आप हारते है, हार तो तब होती है जब आप हार मान लेते है । मन के हारे हार , मन के जीते जीत [sliderpro id=”1″]

भक्ति की आँच धीमी ना पड़े……

भक्ति आग की तरह है सुमिरन घी की तरह यदी तुम चाहते हो की .भक्ति की आँच धीमी ना पड़े तो सांस सांस मे सुमिरन का घी डालते रहो |

ईश्वर और सतगुरू पर यकीन रखते है

ईश्वर और सतगुरू पर यकीन रखते है,उनका बाल भी बाका नही होता है, एक राजा बहुत दिनो से पुत्र की प्राप्ती के लिये आशा लगाये बैठा था,पर पुत्र नही हुआ ।उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से सहयोग की बात बताई ।सुझाव मिला कि किसी बच्चे की बलि दे दी जाये तो पुत्र प्राप्ती हो जायेगी ।….