।। श्री राधा कृष्णाय नमः ।। जन्माष्टमी के पावन पर्व के शुभ अवसर पर आप सभी श्रद्धालुओं को सूचित करते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि श्रीधाम वृंदावन की पवित्र भूमि पर श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अलौकिक कथा में आप सभी सादर आमंत्रित हैं। आइए, भगवान श्री….
वह एक परम आनंदमयी (भावविभोर) अवस्था में थे। कुछ समय के लिए मेरे चरणों में रहने के बाद, उन्होंने अपना जनेऊ और सोने की चेन उतार दी और मंत्रों का उच्चारण करने लगे। उन्हें पवित्र जनेऊ और सोने की चेन पहने रहने की सलाह दी गई थी। इस दौरान, उन्होंने पवित्र झील मानसरोवर के तट….
मैं अपने बाबू जी के बारे मे क्या कहूँ वह इस जीवन के तप को श्री हरि चरणों में समर्पित कर हम दोनों बहन भाई (नन्दिनी व केशव) के लिए जीवानोद्धार के द्वार खोल गये उन का श्री महाराज जी के प्रति समर्पणे हम लोगों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहा। हम लोगों को बचपन….
मानसिक पूजाकी विधि ॐ पादयोः पाद्यं समर्पयामि नारायणाय नमः ॥ १ ॥ इस मन्त्रको बोलकर शुद्ध जलसे श्रीभगवान्के चरणकमलोंको धोकर उस जलको अपने मस्तकपर धारण करना ॥ १ ॥ ॐ हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि नारायणाय नमः ॥ २ ॥ इस मन्त्रको बोलकर श्रीहरिभगवान्के हस्तकमलोंपर पवित्र जल छोड़ना ॥ २ ॥ ॐ आचमनीयं….
Chandra Grahan 2026 Negative Impact: इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा. उस दिन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन है. ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना बताती हैं कि मेष समेत 8 राशियों पर चंद्र ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव होगा. इससे करियर और सेहत पर अशुभ प्रभाव होगा…..
नसिङ्ग होममें श्रीहरेकृष्ण पूज्य हरिबाबा जी महराज की सेवा में रहते थे। इनका जन्म पूर्व बंगालमें, जिसे अब ‘बंगला देश’ कहते हैं, हुआ था। बाल्यावस्थामें इन्होंने भावुक भक्तोंके मुखसे सुना था कि भगवान् श्रीवृन्दावनधाममें रहते हैं। अतः भगवद्दर्शनकी लालसासे ये थोड़ा-सा खर्चा लेकर वृन्दावन चले आए। यहाँ अपने एक सम्बन्धीके घर ठहर कर ये मन्दिरोंमें….
“बाबा हृदय को पकड़ना जानते थे और उसे निभाना भी।” पीछे आपका संग पूज्यपाद श्रीहरिबाबाजी के साथ हो गया। यों कुछ परिचय तो पहले भी हो चुका था, परन्तु प्रधानतया इन दोनों महापुरुषोंका समागम बाँध बँधने के पीछे ही हुआ और फिर ऐसा हुआ कि दोनों मिलकर एक हो गये । जैसे निमाई और निताई….
श्री महराज जी (पूज्य उड़ियाबाबा जी महराज ) के संकल्प मात्र से कार्य सिद्ध होजाते थे संस्मरण – द्वारा श्रीमती ठकुरानी साहिब मेरे पति आनरेरी मजिस्ट्रेट थे। एक दिन श्रीमहाराजजी के समक्ष चर्चा चली कि यह एक राजकीय सम्मान है। आप बोले, यह सम्मान तो तुच्छ है, सम्मान तो उपाधि का ही माना जाता है।”….
लोग अक्सर पूछते हैं, “भगवान कैसे मिलेंगे?” पर यदि मन के भीतर झाँककर देखा जाए, तो प्रश्न कुछ और ही दिखाई देता है। क्या सचमुच हमें भगवान चाहिए? यदि आज भगवान स्वयं हमारे सामने प्रकट होकर पूछ लें—”बताओ, क्या चाहते हो?”—तो कितने लोग कहेंगे, “मुझे केवल आपकी भक्ति और आपका सान्निध्य चाहिए।” अधिकांश लोग तो….







