भगवान श्री राम ने भगवान शिव की स्तुति – शम्भु स्तुति

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श्रीराम रचित शम्भु स्तुति  भगवान श्री राम ने भगवान शिव की स्तुति – शम्भु स्तुति जिसका विस्तार से वर्णन ब्रह्म पुराण में मिलता है  लंका प्रवेश के लिए समुंद्र पर सेतु निर्माण के समय भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम में महादेव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं शिवलिंग की स्थापना की और भगवान शिव का आह्वान….

हरि नाम ही जीवन का सच्चा आधार है।

 श्रीकृष्ण की प्रसन्नता ही सच्ची भक्ति का आधार है  पूर्ण शरणागत भक्त अपने प्रत्येक कर्म को प्रभु की सेवा और प्रसन्नता के लिए करता है। उसके लिए केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि स्नान, भोजन, शयन और दैनिक जीवन का प्रत्येक कार्य भी भजन का ही एक अंग बन जाता है।  जब मन और कर्म दोनों….

पूज्य श्री उड़िया बाबा जी द्वारा गीता सार

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पूज्य श्री उड़िया बाबा जी द्वारा गीता सार (श्लोक 10 से 16 प्रथम अध्याय )   अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्। पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ।।१०।। अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः । भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ।।११।। अर्थ  भीष्मपितामह से रक्षित जो हमारी सेना है वह अपरिमित है और इन पाण्डवों की भीम से संरक्षित सेना….

पूज्य श्री उड़िया बाबा जी द्वारा गीता सार (1 से 9 श्लोक)

पूज्य श्री उड़िया बाबा जी द्वारा गीता सार  श्री गीतातत्त्वालोक अथ प्रथमोऽध्यायः (1से 9श्लोक ) धृतराष्ट्र उवाच   1)धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ।।१ ।।   धृतराष्ट्र ने कहा- हे सञ्जय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्रित हुए मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया।   प्रश्न-….

त्याग और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे हमारे बाबा- पूज्य उड़ियाबाबा जी

त्याग और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे हमारे बाबा- पूज्य उड़ियाबाबा जी रामघाट में इमली के नीचे एक फूस की कुटी थी। उसमें सिरकी लगी थी। बाहर एक लँगोटी और भीतर जल भरा कमण्डलु । भगवती भागीरथी के तट पर उस महान् योगी की पर्ण-कुटी त्याग-वैराग्य की प्रतीक थी। प्रातःकाल आप किसी से मिलते नहीं थे।….

प्रतिदिन एक श्लोक का पाठ – अठारह पुराणोंके पाठका फल प्राप्त करता है

प्रतिदिन एक श्लोक का पाठ –अठारह पुराणोंके पाठका फल प्राप्त करता है भगवान् श्रीकृष्णने भागवतका माहात्म्य बताते हुए ब्रह्माजीसे कहा है- यः पठेत् प्रयतो नित्यं श्लोकं भागवतं सुत। अष्टादशपुराणानां फलमाप्नोति मानवः ॥ डीम फिक (स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्ड, मार्गशीर्षमाहात्म्य १६ । ३३) पुत्र ! जो प्रतिदिन पवित्रचित्त होकर भागवतके एक श्लोकका पाठ करता है, वह मनुष्य अठारह….

नई कोठरीयों की प्रतिष्ठा:-अन्तर्यामी पूज्य उड़ियाबाबा जी महराज

नई कोठरीयों की प्रतिष्ठा:-अन्तर्यामी पूज्य उड़ियाबाबा जी महराज  एक दिन रात को स्वप्न में बाबा ने दर्शन दिया और बोले, ‘फलाहार का प्रबन्ध कर, आज मौनीबाबा आ रहे हैं।” बस, उसी दिन दस-ग्यारह बजे मौनीबाबा आ यये । मैंने उन्हें स्वप्न का सारा हाल सुनाया। वे बोले, “जैसे गाड़ी छूटने से पहले तार बाबू आगे….

“घनश्याम“ साधारण बृजवासी बालक नही है ….ये साक्षात् ठाकुर जी ही है”

श्रीवृन्दावन में उड़िया बाबा जी के आश्रम में ये रास लीला चल रही है …..रास लीला का दर्शन करने वालों में स्वयं सिद्ध सन्त उड़िया बाबा जी , हरि बाबा जी , आनन्दमयी माता पण्डित गया प्रसाद जी आदि आदि अनेक संतों के साथ साथ रास लीला के रसिकों की भी पूरी भीड़ थी ।….

इस से बड़ा चमत्कार और क्या है –

इस से बड़ा चमत्कार और क्या है ? पूज्य श्री श्री उड़िया बाबा जी महराज से  जब प्रसिद्ध आध्यात्मिक लेखक पॉल ब्रन्टन ने उनसे कोई सिद्धि दिखाने की बात कही, तब बाबा ने बहुत सुंदर उत्तर दिया — “जल की एक बूँद शरीर बन गई, चलती है, सोचती है और बोलती है — इससे बड़ा….

क्या आपको सचमुच भगवान की चाहत है? एक बार खुद से पूछें यह सवाल

लोग अक्सर पूछते हैं, “भगवान कैसे मिलेंगे?” पर यदि मन के भीतर झाँककर देखा जाए, तो प्रश्न कुछ और ही दिखाई देता है। क्या सचमुच हमें भगवान चाहिए? यदि आज भगवान स्वयं हमारे सामने प्रकट होकर पूछ लें—”बताओ, क्या चाहते हो?”—तो कितने लोग कहेंगे, “मुझे केवल आपकी भक्ति और आपका सान्निध्य चाहिए।” अधिकांश लोग तो….